Friday, February 25, 2011

जलवाय्ाु परिवर्तन के जिम्मेदार कारणों से अनुकूलन नहीं उनका शमन करेंःकलेक्टर


जलवाय्ाु परिवर्तन पर जन परामर्श कायर््ाशाला संपन्न
छतरपुर। सालµदरµसाल मौसम में बदलाव और मौसम के विपरीत प्रभाव को हम सभी स्पष्ट रूप से महसूस कर रहे हैं। पयर््ाावरण परिवर्तन आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय्ा है जिस पर अंतरराष्ट्रीय्ा स्तर पर लगातार विचारµविमर्श हो रहा है। छतरपुर जिले में इस कायर््ाशाला का आय्ाोजन सराहनीय्ा पहल है। कलेक्टर डॉ. ई. रमेश कुमार ने होटल जटाशंकर पैलेस में बुधवार को जलवाय्ाु परिवर्तन विषय्ा पर आय्ाोजित जन परामर्श कायर््ाशाला को शुरूआत बताते हुए कहा कि इससे हमें शीघ्र बडे परिवर्तन की उम्मीद भले न करें पर ऐसे आय्ाोजनों से हम प्रकृति, पयर््ाावरण और जलवाय्ाु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने के लिए अवश्य्ा मजबूर हुए हैं।
कलेक्टर डॉ. ई. रमेश कुमार ने कहा कि पयर््ाावरण अकेले एक विभाग का कायर््ा नहीं हो सकता बल्कि य्ाह सभी विभागों के लिए महत्वपूर्ण विषय्ा है, इसलिए आवश्य्ाक है सभी विभाग अपनी कायर््ाय्ाोजना बनाने और उसके क्रिय्ाान्वय्ान में जलवाय्ाु परिवर्तन जैसे पयर््ाावरणीय्ा मुद्दों का समावेश अवश्य्ा करें। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जागरूकता बढाने की आवश्य्ाकता है जिसे प्रत्य्ोक व्य्ाक्ति अपनेµअपने स्तर और अपनेµअपने साधनों से बढा सकता है। ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि वर्तमान पीढी को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संसाधनों का उतना ही उपय्ाोग करना चाहिए जिससे कि भावी पीढिय्ाों की जरूरतें भी पूरी होती रहें। हम अपनी जीवनशैली को बेहतर से बेहतर बनाने के प्रय्ाासों में भावी पीढिय्ाों का नुकसान न करें। उन्होंने कहा कि जलवाय्ाु परिवर्तन हेतु जिम्मेदार कारणों की जडों में जाकर उन कारणों से अनुकूलन करने की जगह उनका शमन जीवन का सूत्र्ा होना चाहिए।
जिला पंचाय्ात सीईओ श्रीमती भावना वालिम्बे ने कायर््ाशाला को संबोधित करते हुए कहा कि छतरपुर जिले के कुछ ग्रामों में भूमिगत जल का स्तर बहुत नीचे है। ऐसे ग्रामों में ग्रामीणों तथा पशुओं के पेय्ाजल हेतु विशेष य्ाोजनाओं की आवश्य्ाकता है। जलसंरक्षण हेतु जिले में रिवर रिवाईवल के साथ आईडब्ल्य्ाूएमपी य्ाोजना के तहत 6 प्रोजेक्ट काम कर रहे हैं। वनसंरक्षक श्री अनूप सिंह राजपूत ने जिले की वन उपलब्धता और उसके उपय्ाोग, संरक्षण तथा वनवृद्घि को लेकर विस्तार से चर्चा की। श्री राजपूत ने कहा कि ग्रामीणों को रिय्ााय्ाती दरों में इमारती लकडी उपलब्ध कराकर वनकटाई को रोका जा सकता है। ईंधन के लिए ऊर्जावन तथा आवासों के लिए बांस वन लगाने के साथµसाथ दुधारू पशुओं के लिए चारागाह विकसित करना जरूरी है। वनोपज के लिए जंगलों में आग लगाना तथा सिर पर जलाऊ लकडी ढोने वालों को जनजागरण के माध्य्ाम से जागरूक किय्ाा जाना आवश्य्ाक है। उन्होंने जिले में महुआ, चिरोंजी तथा बेर की बहुताय्ात उपलब्धता बताते हुए आय्ावर्धक गतिविधिय्ाां प्रारंभ करने की आवश्य्ाकता बताई। गरीब लोगों की आय्ा के स्त्र्ाोत बढाकर ही जंगल का विनाश रोका जा सकता है।
कायर््ाशाला में जलवाय्ाु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार 8 विषय्ाों पर समूह बनाकर चर्चा कराई गई। शहरीकरण से जलवाय्ाु परिवर्तन विषय्ा पर समूह चर्चा को प्रस्तुत करते हुए श्री लखनलाल असाटी ने कहा कि शहर के सभी जलस्त्र्ाोतों को आपस में जोडकर तथा इनर्जी आडिट से जल तथा ऊर्जा का संरक्षण किय्ाा जा सकता है। ग्रामीण परिवेश पर सहाय्ाक संचालक उद्यानिकी श्री विजय्ाकांत मिश्रा, कृषि क्षेत्र्ा पर सहाय्ाक संचालक कृषि डॉ. भानु प्रताप सिंह, मीडिय्ाा एवं जनजागृति पर पहल एनजीओ के अध्य्ाक्ष श्री हरिकृष्ण द्विवेदी तथा अशासकीय्ा संगठनों की ओर से श्री सूयर््ाप्रताप सिंह बुंदेला व पयर््ाावरणविद श्री बालेंदु शुक्ला ने सुझ्ााव दिए। इस अवसर पर महाराजा कालेज प्राचायर््ा डा. जी.पी. राजौरे, नगरपालिका सीएमओ श्री सुधीर सिंह, पत्र्ाकार श्री पवन अवस्थी, श्री विकास पचौरी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि व जागरूक नागरिक उपस्थित थे।
म.प्र. शासन की य्ाूएनडीपी परिय्ाोजना के तहत आय्ाोजित राज्य्ा जलवाय्ाु परिवर्तन कायर््ाय्ाोजना का संचालन पयर््ाावरण प्रशिक्षण केंद्र के प्रतिनिधि श्री अविनाश द्वारा किय्ाा गय्ाा। इस अवसर पर राज्य्ा जलवाय्ाु परिवर्तन प्रकोष्ठ के समन्वय्ाक श्री लोकेंद्र ठक्कर ने विषय्ावस्तु पर विस्तार से प्रकाश डालकर कायर््ाशाला के विषय्ा से सभी को अवगत कराय्ाा। भारतीय्ा वन प्रबंधन संस्थान भोपाल के सहाय्ाक प्राध्य्ाापक डॉ. अरविंद विजलवान सहित कायर््ाशाला में छतरपुर, टीकमगढ तथा दतिय्ाा जिलों के प्रतिनिधिय्ाों ने हिस्सा लिय्ाा।

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